
ग़ाज़ीपुर । उत्तरप्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एण्ड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ग़ाज़ीपुर (यू0पी0एम0एस0आर0ए0) द्वारा शहीद ए आज़म भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के शहादत दिवस को लंका स्थित संजय के अहाते में मनाया गया। इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उपस्थित सभी साथियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों के सम्मान में ज़ोरदार नारे लगाने के साथ विचार गोष्ठी हुई। जिसकी अध्यक्षता चन्दन राय तथा संचालन जिला मंत्री मयंक श्रीवास्तव ने किया ।अपने संबोधन में मयंक श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता संग्राम में शहीदे आज़म भगत सिंह और उनके साथियों के योगदान और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शहीदों ने आज़ादी के बाद भारत में मजदूरों किसानों का राज स्थापित करने के लिये अपना बलिदान दिया था ।हिन्दू मुसलमान सब ने मिलकर अंग्रेज़ी सरकार के दमन को नाकाम करते हुये देश को आजादी दिलायी थी। आज सरकारें फूट डालो राज करो की नीति पर चलते हुए देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस के लिये भगत सिंह के विचारों को पढ़ना और समझने की जरूरत है उन्होंने कहा कि मजदूरों किसानों को मिल कर बड़े आंदोलन की तैयारी करनी चाहिए।
राज्य कार्यकारिणी सदस्य मो0 अफ़ज़ल ने कहा कि 23 साल की उम्र में भगत सिंह ने इन्कलाब का नारा लगाते हुये फांसी का फंदा चूमा था। उनकी लोकप्रियता से ब्रिटिश सरकार इतना परेशान थी कि दो दिन पहले ही गहरी साज़िश कर के 23 मार्च 1931 को फांसी देकर उनके शव को अमानवीय तरीके से जलाने का काम किया था । जिसका पूरे देश में जबरदस्त विरोध हुआ था। आज मजदूरों को चाहिए कि उनको गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड को वापस कराने निजीकरण, ठेकाप्रथा, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी के खिलाफ तथा बन्द उद्योगों को चालू करने, 26000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, पुरानी पेंशन तथा ई पी एफ पेंशन रुपये 10000 करने आदि मांगों को लेकर 21 अप्रैल लखनऊ रैली एवं केन्द्रीय श्रम संघों द्वारा 20 मई को राष्ट्र व्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिये अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए । यही सही मायने में शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिये सभी साथियों का आभार व्यक्त करते हुये गोष्ठी का समापन किया गया ।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निकेत तिवारी, रामप्रवेश यादव, संजय विश्वकर्मा, हरिशंकर गुप्ता, विशाल जायसवाल, अरुण सहाय, मनीष श्रीवास्तव, राहुल यादव, सुधीर राय, मोहित गुप्ता, अविनाश शर्मा, संत प्रताप, सूरज विश्वकर्मा, आशीष राय, कमलेश पांडेय, रविकांत तिवारी आदि शामिल रहे।
Narad Vani The Critical Opinion