
भांवरकोल ( गाजीपुर )। क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में चैत माह के बुढ़वा मंगल के अवसर पर भव्य, होली एवं चैता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान चईता गीतों की मधुर धुनों ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक झूमने पर मजबूर हो गए। होली के बाद फाग के गीतों की जगह अब चैता की गूंज सुनाई देने लगी है। इसी क्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक चैता (चैती) गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। ‘दो गोला’ शैली में हुए इस आयोजन में गायक-वादकों की जुगलबंदी ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। चईता, भोजपुरी अंचल का एक प्रमुख अर्ध-शास्त्रीय लोकगीत है, जो विशेष रूप से चैत्र माह में गाया जाता है। इन गीतों में धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सुंदर समावेश होता है, जिनमें भगवान राम और राम नवमी से जुड़े प्रसंग प्रमुख रहते हैं।इस मौके पर प्रधान प्रतिनिधि जयानंद राय (मोनू), अविनाश प्रधान, इंद्रासन राय, मदन दूबे, राहुल राय, मुन्ना राय, राकेश राय, गबदू पहलवान, राजकुमार सोखा, छोटन राय, सोनू राय मास्टर, रामजी गुप्ता, जीतन राय, उमेश राय व सोनू राय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे । आयोजकों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
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